
कुल्लू। पर्यटन के नाम पर भले ही देश-विदेश में नाम कमा चुकी कुल्लू घाटी में सालाना लाखों की संख्या में पर्यटक सैर सपाटे के लिए आते हैं, लेकिन अभी भी कई ऐसे पर्यटन स्थल सरकार व पर्यटन विभाग की अनदेखी का शिकार हैं।
इन पर्यटन स्थलों पर सालाना हजारों की तादाद में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव से इन पर्यटक स्थलों का स्तर गिरता ही जा रहा है। जिले के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रा भी उनमें से एक है, जो बिजली के बिना अंधेरे में है। सरकार व विभाग ने बीते वर्षों में यहां बिजली पहुंचाने के लिए कई दावे किए, लेकिन सब खोखले ही साबित हुए हैं। बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के अभाव में यहां न तो सैलानी रुक पाते हैं और न ही पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है। 90 साल पूर्व 1923 को सड़क सुविधा से जुडे़ इस ऐतिहासिक पर्यटन स्थल की हालात आज भी वही है, जो पहले थी। इस कारण यहां के व्यवसायी व इलाके के लोगों में सरकार व विभाग के प्रति भारी रोष है। राजीव गांधी योजना के तहत बिजली पहुंचाने की बात कही जा रही थी, लेकिन वह भी कागजों में ही दर्ज होकर रह गई है। यहां व्यवसाय करने वाले मोहर सिंह, जय प्रकाश तथा दलीप सिंह का कहना है कि पर्यटन स्थल जलोड़ी दर्रे में बिजली की गंभीर समस्या है। बिजली के अभाव से सैलानी यहां नहीं ठहरते। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर यहां सैलानियों की सुविधा के लिए होटल, हट या अन्य सुविधा मुहैया करवानी हो तो बिजली के बिना यह संभव नहीं है।
दुकानदारों का कहना है कि इस कारण से घाटी के अन्य पर्यटन स्थल रघुपुरगढ़, सरयोलसर, टकरासी तथा पनेऊ विकसित होने के बजाय पिछड़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां नैसर्गिक सौंदर्य को देखते हुए हर साल सैलानियों की संख्या में इजाफा हो रहा है, लेकिन सरकारी तौर पर पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां पर्यटन स्थलों को विकसित करने पर कोई भी सुविधा नहीं दी जा
रही है।
